skip to main
|
skip to sidebar
merikavita
Thursday, June 3, 2010
बड़ी दुश्वार हैं हमको यह रातें चाँद की
उनसे मिलने जाऊं तो साए साथ चलते हैं
1 comment:
daanish
July 7, 2010 at 6:14 AM
साए साथ चलते हैं ...
कभी रहबर बन कर ,,,
तो कभी राहज़न हो कर
बहुत कठिन है डगर पनघट की.......
Reply
Delete
Replies
Reply
Add comment
Load more...
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Followers
Blog Archive
▼
2010
(15)
►
November
(1)
►
September
(2)
►
July
(3)
▼
June
(1)
बड़ी दुश्वार हैं हमको यह रातें चाँद की उनसे मिलने...
►
May
(7)
►
April
(1)
About Me
Arun
View my complete profile
साए साथ चलते हैं ...
ReplyDeleteकभी रहबर बन कर ,,,
तो कभी राहज़न हो कर
बहुत कठिन है डगर पनघट की.......