Thursday, June 3, 2010

बड़ी दुश्वार हैं हमको यह रातें चाँद की
उनसे मिलने जाऊं तो साए साथ चलते हैं

1 comment:

  1. साए साथ चलते हैं ...
    कभी रहबर बन कर ,,,
    तो कभी राहज़न हो कर
    बहुत कठिन है डगर पनघट की.......

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