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merikavita
Wednesday, May 26, 2010
मेरे साथ चलती है परछाई बनके
यह तन्हाई भी मुझे तन्हा नहीं छोडती
तेरा इश्क भी गुनाह साबित हो गया है हम पर
पहचाना पहली बार तुमने, वोह भी कहाँ आ के
Friday, May 21, 2010
अभी न करो मरहम मेरे ज़ख्मों की
अभी मेरे चंद दोस्तों का आना बाकी है
Monday, May 17, 2010
न कद्र दुनिया को अब मैं क्या कहूं 'साहब'
जिसको मोहब्बत नहीं उस से शिकवा क्या करूँ
Thursday, May 13, 2010
बात बात पे दिल का थामना, ठंडी सांसें
इश्क वोह रोग है जो जान लेता है प्यार से
Monday, May 10, 2010
उलझन बन गयी है माथे पे आयी लट उनकी
उँगलियों पे वोह घुमाते हैं, घुटा मेरा दिल जाता है
Wednesday, May 5, 2010
भीड़ से कैसी उम्मीद इन्कलाब की
लोट जायेंगे यह तमाशाई, तमाशे के बाद
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मेरे साथ चलती है परछाई बनके यह तन्हाई भी मुझे तन्...
तेरा इश्क भी गुनाह साबित हो गया है हम पर पहचाना...
अभी न करो मरहम मेरे ज़ख्मों की अभी मेरे चंद दोस्त...
न कद्र दुनिया को अब मैं क्या कहूं 'साहब' जिसको मोह...
बात बात पे दिल का थामना, ठंडी सांसें इश्क वोह रोग...
उलझन बन गयी है माथे पे आयी लट उनकी उँगलियों पे वो...
भीड़ से कैसी उम्मीद इन्कलाब की लोट जायेंगे यह तमाश...
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