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merikavita
Monday, May 10, 2010
उलझन बन गयी है माथे पे आयी लट उनकी
उँगलियों पे वोह घुमाते हैं, घुटा मेरा दिल जाता है
1 comment:
daanish
May 13, 2010 at 7:57 PM
aaein na jab talak wo, to bechain hai hr pal
bechaini aur bhi gher le, jab wo mil jata hai
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aaein na jab talak wo, to bechain hai hr pal
ReplyDeletebechaini aur bhi gher le, jab wo mil jata hai